अभी अभी आई है फिरोज़ा
बिस्तर पर पटक कर बस्ता
नहाने गई है
मैं फिरोज़ा को नहाते हुए देखता हूँ रोज़
जानती है फिरोज़ा
फिरोज़ा ने बताया था
कितने और कैसे कैसे अलग होते हैं
लड़के और लड़कियां
और हमने जीभ जीभ इमली चखा था...
बचपन में बताया तो गया था मुझे
कि हिन्दुओं के एकदम उलट होते हैं मुसलमान
और उसने तस्दीक भी कर दी
हाँ, पर, स्वीकार नहीं किया मैंने ..
बुरी लड़की थी फिरोज़ा
मुझे बताये बिना चली गयी
सुना था
निकाह कर लिया
अपने ही किसी भाई से
रहता था जो दूर दिल्ली में कहीं.
उसी दिन मेरे लिए मर गयी फिरोज़ा
मैंने चिन्हित भी कर दी
उसके नाम की कब्र
एक तीर वाला दिल अब भी दिखता है वहां
मेरी रोपी नागफनी
पूरे कब्रिस्तान में फैली है
कब्रिस्तान की टूटी दीवार पर पैर नीचे लटकाए
मैं खाता हूँ मूंगफली
वहीं खाली पड़ी कब्र में सर के बल खड़ी रहती है फिरोज़ा
फिरोज़ा अब एक भूत है
नहीं लिखूंगा फिर उस भूत पर कविता..
- शायक अलोक, नई दिल्ली
बिस्तर पर पटक कर बस्ता
नहाने गई है
मैं फिरोज़ा को नहाते हुए देखता हूँ रोज़
जानती है फिरोज़ा
फिरोज़ा ने बताया था
कितने और कैसे कैसे अलग होते हैं
लड़के और लड़कियां
और हमने जीभ जीभ इमली चखा था...
बचपन में बताया तो गया था मुझे
कि हिन्दुओं के एकदम उलट होते हैं मुसलमान
और उसने तस्दीक भी कर दी
हाँ, पर, स्वीकार नहीं किया मैंने ..
बुरी लड़की थी फिरोज़ा
मुझे बताये बिना चली गयी
सुना था
निकाह कर लिया
अपने ही किसी भाई से
रहता था जो दूर दिल्ली में कहीं.
उसी दिन मेरे लिए मर गयी फिरोज़ा
मैंने चिन्हित भी कर दी
उसके नाम की कब्र
एक तीर वाला दिल अब भी दिखता है वहां
मेरी रोपी नागफनी
पूरे कब्रिस्तान में फैली है
कब्रिस्तान की टूटी दीवार पर पैर नीचे लटकाए
मैं खाता हूँ मूंगफली
वहीं खाली पड़ी कब्र में सर के बल खड़ी रहती है फिरोज़ा
फिरोज़ा अब एक भूत है
नहीं लिखूंगा फिर उस भूत पर कविता..
- शायक अलोक, नई दिल्ली